दीवाली त्योहार क्यों और किस उपलक्ष में मनाया जाता है

October 11, 2019
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ 
क्यों मनाते हैं हम दीपावली, क्यों जलाई जाती है पुरे घर में, शहरों में, और गावों में, दीपों की श्रृंखला तथा क्यों की जाती है दीपावली के रात को माँ लक्ष्मी, के साथ श्री गणेश की पूजा दोस्तों यह आर्टिकल इसी विषय पर है, इस आर्टिकल से आपको इन्ही प्रश्नों का उत्तर मिलेगा आप उपरोक्त सभी बातों को जान पाएँगे एकदम कम समय दे कर,

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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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क्यों मनाते हैं हम दीपावली ?
राजा दशरथ अयोध्या के राजा थे उनके चार पुत्र हुए राम, लक्ष्मण, भरत, और सत्रुघन, राजा दसरथ के तिन पत्नियाँ थीं कौसल्या, कैकई, और सुमित्रा, राम माता कौसल्या के पुत्र थे एवं वे सबसे बड़े थे दुसरे पुत्र भरत की माता कैकई थीं तथा लक्ष्मण एवं सत्रुघन माता सुमित्रा के गर्भ से जन्म लिए थे,

जब महाराज दसरथ को बहुत वर्षों तक पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होनें श्रृंगी ऋषि के मदद से पुत्रकामेष्टि महायज्ञ का अनुष्ठान किया तब उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर अग्निदेव एक पात्र लेकर प्रकट हुए पात्र में महायज्ञ का प्रसाद खीर था अग्निदेव ने प्रसाद महारानी को खिलाने को कहा, महाराज दसरथ ने खीर का दो भाग कर के रानी कौसल्या एवं रानी कैकई को खाने के लिए कहा, पर रानी कौसल्या और रानी कैकई अपने अपने हिस्से का एक एक भाग रानी सुमित्रा को खिला देती हैं इसलिए रानी सुनित्रा के दो पुत्र में से लक्ष्मण का राम के साथ अधिक प्रेम था और सत्रुघन का भरत के साथ ज्यादा स्नेह देखा जाता था, परन्तु चारो भाई का आपस में बहुत स्नेह था,

जब चारो भाइयों की शिक्षा दीक्षा समाप्त हो गई और राम का विवाह महाराज जनक के पुत्री सीता के साथ संपन्न हुई तब महाराज दसरथ ने राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोसना की पर मंथरा के बहकावे में आकार कैकई ने महाराज दसरथ से वचन ले लिया की राम को १४ वर्ष का वनवास हो और भरत को राजा बनाया जाए, जैसा की ऊपर मैं बता चूका हूँ की राम के साथ लक्ष्मण का अधिक लगाव था इसलिए जब श्री राम और माता सीता वन जाने लगे तो लक्ष्मण भी बड़े भैया राम और भाभी सीता के सेवा भाव के लिए उनके साथ वन में प्रवास करने के लिए चले गए,

वन में माता सीता को अकेले पाकर रावण हरण कर के लंका ले जाता है, तो श्री राम और लक्ष्मण वानर राज सुग्रीव एवं हनुमान का सहायता लेकर लंका में जाकर रावण के कुल का विनाश कर देते हैं और रावण को मार कर माता सीता को मुक्त कराते हैं, फिर जब सीता को अपने साथ लेकर श्री राम, लक्ष्मण, सुग्रीव, हनुमान, और विभीषण जो की रावण का छोटा भाई था और युद्ध में श्री राम का सहायक रहा था सभी अयोध्या वापस आते हैं,



आश्विन शुक्ल पक्ष दसमी यानि दसहरे के दिन रावण को मार कर श्री राम विजय हुए थे, और जिस दिन श्री राम अयोध्या वापस आए थे वो दिन आश्विन महीनें के कृष्ण पक्ष त्रियोदसी था यह दसहरे के 18 वें दिन आता है, इसी दिन के रात्रि को हम दीपावली मनाते हैं, जब श्री राम अयोध्या में प्रवेश कर रहे थे तो उनके स्वागत में पुरे अयोध्या में अयोध्या वासियों ने दिप जलाकर उनका स्वागत किया था तब से अँधेरे पर उजाले की विजय के रूप में हम सभी लोग दीपों की एक श्रृंखला जलाकर दीपावली पर्व को बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं, माँ लक्ष्मी का पूजन करते हैं और सभी को मिठाइयाँ बाटते है बच्चे पटाखे और फुलझड़ियाँ जला कर खुश होते हैं,

दोस्तों रामायण बहुत लम्बी कथा है इस महाकाब्य की रचना महर्षी बाल्मीकि ने लगभग 6000 हजार वर्ष पूर्व संस्कृत भाषा में की थी इसमें लगभग 2400 श्लोक है फिर गोस्वामी तुलशीदास जी ने इस महाकाब्य को अवधि भाषा में लिखा जिसे हम रामचरित्रमानस के नाम से जानते हैं, मैंने Happy Diwali लेख के लिए कुछ प्रसंगों को बहुत संक्षेप में बताने का प्रयास किया है अगर आप विस्तार से रामायण के बारे में जानना चाहते हैं तो रामायण विकीपीडिया पर क्लिक कीजिए और अगर आप अपने मित्रों को शुभ दीपावली की डिजिटल ग्रीटिंग्स भेजना चाहते हैं तो Share बटन पर क्लिक कीजिए !


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माँ लक्ष्मी के साथ श्री गणेश की पूजा क्यों होती है ?

दीपावली के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है जिससे हमारे घर मे धन की कमी ना होने पाए और घर में सुख शांति बनी रहे परन्तु माता लक्ष्मी के साथ श्री गणेश की पूजा भी बहुत आवश्यक है, इसे इस प्रकार समझा जा सकता है अगर आप के पास बहुत अधिक धन हो पर आपके पास बिलकुल भी बुद्धि ना हो तो आप धन को अधिक दिनों तक सम्हाल कर नहीं रख सकते और उसे अच्छे कार्यों में खर्च नहीं कर सकते आपका धन या पैसा कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगा, आपने सुना होगा "जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना, जहाँ कुमति तहाँ बिपत्ती निधाना " अर्थात जहाँ सुमति, बुद्धि, विवेक, ज्ञान, नहीं होता वहां माता लक्ष्मी नहीं रह सकतीं, लम्बोदर श्री गणेश जी बुद्धि दाता और दुख हरने वाले देवता हैं अतः माता लक्ष्मी के साथ हम भगवान श्री गणेश की पूजा भी करते है जिससे की माता लक्ष्मी हमारे घर को धन से भर दें और उसे सम्हालने के लिए भगवान श्री गणेश हमें बुद्धि देते रहें तभी हमारे दुखों का अंत होगा और हमारे घर की सुख शांति बनी रहेगी !!
                                                                                
                                                     === धन्यवाद ===


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