Happy Gandhi Jayanti | गाँधी जयंती क्यों मनाया जाता है

January 16, 2020
गाँधी जयंती क्यों मनाया जाता है, महात्मा गाँधी के बचपन का नाम क्या था, क्यों उन्हें महात्मा की उपाधि मिली है, और उन्हें हम राष्ट्रपिता एवं बापू क्यों कहते हैं, इस आर्टिकल से इन्हीं सवालों का जवाब संक्षिप्त में जान पाएँगे और गाँधी जयंती का एक सुंदर सा डिजिटल ग्रिटिंग्स अपने मित्रों को सेंड करेंगे,
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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

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महात्मा गाँधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था, उनके पिता करमचंद गाँधी सनातन धर्म की पंसारी जाति के थे, उनके बचपन का नाम मोहनदास था, लेकिन उनके पिता के नाम पर उनका नाम मोहनदास करमचंद गाँधी पड़ा, उनके पिता ब्रिटिश राज के समय काठियावाड की एक छोटी सी रियासत पोरबंदर के दीवान थे, उनकी माता का नाम पुतलीबाई था, वे परनामी वैश्य समुदाय की थी, पुतलीबाई करमचंद गाँधी की चौथी पत्नी थी, उनकी पहली तीन पत्नियों की पहले ही मृत्यु हो गयी थी,
पोरबंदर से उन्होंने मिडिल और राजकोट से हाई स्कूल की शिक्षा ली, मई 1883 में 13 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा माखनजी से कर दिया गया, उस समय बाल विवाह का प्रचलन था,

19 वर्ष की आयु में वे 4 सितम्बर 1888 को "युनिवेर्सिटी कॉलेज लन्दन" में कानून की पढाई करने के लिए लन्दन चले गए, बचपन से ही उनके पिता उन्हें बैरिस्टर बनाना चाहते थे, 1875 ई में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की गयी थी इसे बोद्ध धर्म एवं सनातन धर्म के अध्ययन के लिए समर्पित किया गया था, जब गाँधी जी इस संस्था से जुड़े तो उन लोगों ने उन्हें श्रीमद् भगवद्गीता पढने के लिए प्रेरित किया, 1893 में वे एक भारतीय फर्म के करार के तहत दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने चले गए, इस यात्रा के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा उनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें तृतीय श्रेणी के रेल डिब्बे में सफ़र करना पड़ा, वहां जाकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतिये समुदाए के लोगों के नागरिक अधिकार के लिए सत्याग्रह किया उन पर हो रहे अन्याय के खिलाफ अंग्रेजी साम्राज्य से भारतियों के सम्मान के लिए प्रश्न उठाई,

1915 में वे दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट आए, 1918 में महात्मा गाँधी ने सबसे पहला चंपारण सत्याग्रह और खेडा सत्याग्रह किया उसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के लिए गावों की सफाई स्कूल और अस्पताल बनवाने के लिए और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए ग्रामीणों का नेतृत्व किया परन्तु ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें अशांति फ़ैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उन्हें उस प्रान्त को छोड़ने के लिए आदेश दिया इस घटना के बाद हजारों की तादाद में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया जेल और पुलिस स्टेशन के बाहर रैलियां निकाली गयी इस संघर्ष के दौरान ही सबसे पहले राजवैध जीवराम कालिदास ने गाँधी जी को महात्मा गाँधी के नाम से संबोधित किया और 6 जुलाई 1944 को सुभास चन्द्र बोस ने रंगून रेडियो से गाँधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें रास्ट्रपिता कहकर संबोधित किया और आजाद हिन्द फ़ौज के लिए आशीर्वाद माँगा, उसके बाद आम जनता भी गाँधी जी को बापू और रास्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नाम से संबोधित करने लगे,

गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन, अहिंसा तथा शांतिपूर्ण प्रतिकार को अंग्रेजों के खिलाफ शस्त्र के रूप में प्रयोग किया,चौरी चोरा आन्दोलन, स्वराज और नमक सत्याग्रह आन्दोलन, उसके बाद गाँधी जी ने कांग्रेस पार्टी में रहकर भारत छोडो आन्दोलन नामक विधेयक को चलाकर अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया परन्तु उन्होंने कभी भी अहिंसा और सत्य धर्म को नही छोड़ा, वे श्रीमद् भगवद्गीता को हमेसा अपने साथ रखते थे और शुद्ध शाकाहार भोजन करते थे और आत्मशुद्धि के लिए लम्बी उपवास रखते थे, साबरमती आश्रम में रहते थे जिसे उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे बनाया था ऐसा माना जाता है की पौराणिक कथाओं के दधिची ऋषि का आश्रम भी यहीं पर था, वे स्वयं चरखे में सूत कातकर बनाया हुआ धोती पहनते थे, उन्होंने सभी कांग्रेसियों और भारतियों को अहिंसा के साथ ‘करो या मरो’ का नारा दिया, इस दौरान उन्हें राजद्रोह के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें छ: वर्ष की सजा भी हुई परन्तु आँतों के ऑपरेसन के लिए उन्हें दो वर्ष में ही रिहा कर दिया गया,

आजादी की लडाई में महात्मा गाँधी के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल, भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, लाला लाजपत राय, लाल बहादुर शास्त्री, मंगल पाण्डेय,रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां आदि स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और अंत में 15 अगस्त 1947 को हमें आज़ादी मिली,



परन्तु हमारे भारत के एक मुस्लिम नेता मोहम्मद अली जिन्ना की ज़िद के कारण भारत का बंटवारा करना पड़ा जिसके कारन पाकिस्तान को भारत से अलग कर दिया गया यह बात नाथूराम गोडसे जो की एक स्वतंत्रता सेनानी और हिन्दू महासभा संघ के एक सक्रिय सदस्य भी थे, उसने इस बात के लिए गाँधी जी को जिम्मेदार ठहराया और 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गाँधी प्रातःकाल पूजा के लिए निकले उसी समय नाथूराम गोडसे ने बापू पर लगातार 3 गोलियाँ चलायी जिससे गाँधी जी की उसी समय मृत्यु हो गयी, वे उस समय 79 वर्ष के थे, बापू के मुख से अंतिम शब्द ‘हे राम’ निकला था, बापू हमारे बीच नही रहे,

2 अक्टूबर 1869 ई में महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था इसलिए भारत में इस दिन को गाँधी जयंती और पुरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है और भारत में सभी स्कूल, कॉलेज एवं सरकारी दफ्तरों में इस दिन अवकास रहता है और हम अपने मित्रों को गाँधी जयंती की शुभकामनायें देते है अगर आपको भी अपने मित्रों को शुभकामनायें भेजनी हो तो Share बटन पर क्लिक कीजिये !! 

महात्मा गाँधी की जीवनी विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक किजिए  महात्मा गाँधी   

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