Krishna Janmashtami Ki Kahani

January 11, 2020
Shri Krishna Janmashtami
कृष्णा जन्माष्टमी सनातन (हिन्दू) धर्म का एक एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है हिन्दू समाज में कृष्ण  जन्माष्टमी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है इस पर्व में दही हांड़ी का एक एक अदभुत और भब्य आयोजन किया जाता है जिसमें नगर के बीचोबीच रस्सी के सहारे से दही से भरा हुआ हांड़ी लटकाया जाता है और सभी नवजवान एकदूसरे के कंधे के ऊपर चढ़ कर दही हांड़ी को फोड़ते हैं और माता एवं बहनें श्री कृष्णा की पूजा आराधना करके उत्सव मनाती हैं पर क्या आपको पता है कृष्णा जन्माष्टमी का पर्व हम मनाते क्यों हैं? आइए जानते हैं !


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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,


अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है,
  • एक समय की बात है द्वापर युग अपने अंतिम चरण पर था पूरा संसार कामी क्रोधी और अत्याचारी राजाओं से त्रस्त हो रहा था बच्चे बूढ़े स्त्रियाँ सभी भयभीत रहते थे ना जाने कब इन राजाओं का कहर उन पर टूट पड़े सभी जनता एक असहाय के तरह अपनी जिंदगी जी रहे थे,
  • उसी समय मथुरा में एक नव युवा जोड़ी का विवाह सम्पन्न हो रहा था कन्या का नाम था देवकी जो कि मथुरा के राजा उग्रसेन के भाई देवक की पुत्री थीं और वर थे, वसुदेव जो की मथुरानरेश उग्रसेन के मंत्री थे, कुंती के भाई और यदुवंशी शुर तथा मारिषा के पुत्र थे, राजा उग्रसेन बहुत प्रतापी और धर्मपरायण थे हमेशा अपने प्रजा के सुख सुविधा का ध्यान रखते थे इसलिए उनके राज्य में  सारी  प्रजा उनसे बहुत खुस रहती थी लेकिन उनका पुत्र राकुमार कंस बहुत ही दुस्ट,क्रूर और पापी था वह अपने प्रजा को सुखी देखकर बहुत दुखी होता था इसलिए वह अपने राज्य के सभी कर्मचारियों को धन और मदिरा आदि का प्रलोभन देकर अपने पिता के विरुद्ध कर दिया था तथा अपने साथ मिला लिया था और फिर वह एक शाजिस रच कर अपने पिता उग्रसेन को बंदी बना लिया था और खुद मथुरा का राजा बन बैठा था मथुरा का असली राजा महाराज उग्रसेन अपने ही करागार में अपने पुत्र कंस के बंदी बन कर रह रहे थे, और ऐसे में कंस आज अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव को विवाह उपरांत विदाई करने की खुसी में मग्न था,

  • देवकी और वासुदेव का रथ अपने घर की ओर चल पड़ा था, ठीक उसी समय आकाश से एक ध्वनी सुनाई देती है जिसमें कंस को एक चेतावनी मिलती है, की अरे कंस जिस बहन की विदाई में तू इतना खुस हो रहा है उसी का आठवां पुत्र के हाथों तुम्हारी मृत्यु होगी देवकी का आठवां पुत्र ही तुम्हें मारेगा, यह सुनकर कंश उसी समय देवकी की हत्या करने के लिए आगे बढ़ता है परन्तु वसुदेव के आग्रह पर वह देवकी और वसुदेव को बंदी बना लेता है, फिर वह देवकी और वसुदेव से जन्म लिए हुए छ: पुत्र को कारागार में ही मार देता है और सातवें गर्भ बलराम को देवी योगमाया रोहिणी के गर्व में स्थापित कर देती है परन्तु आठवां बच्चा जो की एक पुत्री के रूप में थी उसे देखकर कंस अचंभित हो जाता है की आकाशवाणी तो आठवें पुत्र की हुई थी फिर ये पुत्री कैसे हो गई परन्तु वह उसे भी मार देना चाहता है लेकीन जैसे ही पत्थर पर पटकने के लिए बच्ची को ऊपर उठता है बच्ची अपने वास्तविक रूप ले लेती है क्योंकि वह भगवान विष्णु की योगमाया थी और नन्द तथा यशोदा की पुत्री के रूप में जन्म लेती है पर जब श्री कृष्ण का जन्म होता है तो वसुदेव की बेड़ियाँ खुल जाती है द्वारपाल मूर्क्षित हो जाते हैं तब वसुदेव कृष्ण को यशोदा के घर में रातोरात पंहुचा देते हैं और उनकी पुत्री को यहाँ ले आते हैं, और अब वही योगमाया कंस को कहती हैं की तुझे मारने वाला जन्म ले चूका है तुम्हारी मृत्यु टल नहीं सकती फिर बालक कृष्ण को मारने के लिए कंस अपने कितने ही राक्षसों को भेजता है पर कृष्ण के हाथों सभी मारे जाते हैं अंततः कंस का सारा प्रयास विफल हो जाता है तथा एक दिन श्री कृष्ण के हाथों से कंस की मृत्यु होती है, फिर श्री कृष्ण महाभारत युद्ध में कौरवों और बाकि दुस्ट राजाओं और उनके सहयोगियों का वध कर के धर्म की स्थापना करने में पांडवों की सहायता करते हैं,

भाद्रपद, कृष्णपक्ष के अष्टमी तिथी को भगवान् श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए हम भगवान श्री कृष्ण के जन्म के दिन कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा बड़ी धूम धाम और श्रधा पूर्वक करते हैं और अपने मित्रों ओर परिवार के सदस्यों को शुभकामनाएँ भेजते हैं,अगर आपको भी कृष्ण जन्माष्टमी की सुभकामना की सुंदर ग्रीटिंग्स अपने मित्रों को भेजनी है तो निचे Share बटन पर क्लीक किजिए !! 





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